Equivalence Certificate: IGNOU से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के लिए एक अच्छी खबर है। एक मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इग्नू की डिग्री के लिए समकक्षता प्रमाणपत्र जरूरी नहीं है।
केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर है। केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट फैसला दिया है कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों से प्राप्त डिग्री के लिए राज्य सरकार की परीक्षाओं में समकक्षता प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होगी। हाईकोर्ट का यह आदेश IGNOU 2025 से पढ़ाई करने वाले लाखों छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जिन्हें पहले इसकी वजह से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
अगर आपने IGNOU या UGC से मान्यता प्राप्त किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है तो आपको किसी राज्य सरकार की परीक्षा के लिए अलग से समकक्षता प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। यह अहम फैसला केरल हाईकोर्ट ने दिया है, जो इग्नू या ऐसे संस्थानों से पढ़ाई करने वाले लाखों छात्रों के लिए राहत की बात है।
एक प्राथमिक शिक्षक ने कालीकट विश्वविद्यालय से स्नातक और फिर IGNOU से स्नातकोत्तर किया। उसने SET (राज्य पात्रता परीक्षा) पास कर ली थी। लेकिन SET आयोजित करने वाली संस्था ने उसकी पीजी डिग्री स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि उसके पास राज्य विश्वविद्यालय से समकक्षता प्रमाणपत्र नहीं है।
मामले में केरल हाईकोर्ट ने कहा कि IGNOU एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जिसे UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से मान्यता प्राप्त है। अगर केंद्रीय विश्वविद्यालय से प्राप्त डिग्री के लिए भी समकक्षता प्रमाणपत्र मांगा जाता है, तो यह यूजीसी कानून का उल्लंघन है। राज्य सरकार द्वारा 2018 में जारी आदेश में भी लिखा है कि राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों से प्राप्त डिग्री के लिए कोई समकक्षता आवश्यक नहीं है। इसलिए एसईटी सूचना पत्र की शर्त, जिसमें समकक्षता को अनिवार्य बताया गया था, गलत है।
इक्विवेलेंस सर्टिफिकेट (Equivalence Certificate) वह डॉक्यूमेंट है, जो किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता या डिग्री के बराबर माना जाता है। यह प्रमाणपत्र तब जारी किया जाता है जब किसी व्यक्ति की योग्यता किसी अन्य देश या बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त योग्यता के बराबर मानी जाती है। यह प्रमाणित करता है कि विदेश में प्राप्त की गई शैक्षणिक योग्यता (जैसे डिग्री या डिप्लोमा) भारत में किसी विशेष डिग्री या योग्यता के बराबर है। विदेश में पढ़ने वाले छात्रों को अक्सर भारतीय विश्वविद्यालयों या संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए इसकी आवश्यकता होती है।
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