देश के शिक्षा बोर्डों के सिलेबस और नतीजों के बीच के अंतर को कम करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। एनसीईआरटी, सीबीएसई समेत शिक्षा बोर्डों के अधिकारियों की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। सीबीएसई की तरह ही अन्य बोर्डों को भी साल में दो बार बोर्ड परीक्षा कराने की योजना बनाने को कहा गया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पिछले कई वर्षों से देश के 66 शिक्षा बोर्डों के परिणामों का विश्लेषण कर रहा है, जिसमें कई बोर्डों के परिणामों में काफ़ी अंतर पाया जा रहा है। विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि बोर्डों के पाठ्यक्रम में एकरूपता न होने के कारण परिणामों में अंतर बढ़ जाता है। इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए मंत्रालय ने देश के शिक्षा बोर्डों, सीबीएसई, एनसीईआरटी और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक की और कई अहम मुद्दों पर फ़ैसले भी लिए गए।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में सचिव संजय कुमार का कहना है कि एनसीईआरटी की संस्था परख ने राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 कराया है, जिसके निष्कर्षों को सभी बोर्डों को देखना चाहिए। स्कूल बोर्डों में पाठ्यक्रम और मूल्यांकन में एकरूपता लानी होगी और इसके लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह सीबीएसई ने 2026 से 10वीं कक्षा में साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है, उसी तरह अन्य बोर्डों को भी इसी तरह की योजना पर काम करना चाहिए, इससे छात्रों को लाभ होगा।
शिक्षा सचिव ने कहा कि सभी शिक्षा बोर्डों को राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) में पंजीकृत किया जा रहा है ताकि छात्रों को कौशल पाठ्यक्रम चुनने का अवसर मिल सके। यह एक बड़ा कदम है क्योंकि कौशल पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए स्कूल बोर्डों का पंजीकरण ज़रूरी है। यह समझना ज़रूरी है कि परिणामों में अंतर क्यों आ रहा है। इसके लिए पाठ्यक्रम से लेकर मूल्यांकन के पैटर्न तक, सब कुछ देखना होगा।
शिक्षा मंत्रालय का उद्देश्य जहाँ तक संभव हो, सभी बोर्डों के पाठ्यक्रम और मूल्यांकन पद्धति में एकरूपता लाना है। इससे छात्रों को समान अवसर प्राप्त होंगे। छात्र मूल्यांकन में निष्पक्षता और एकरूपता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करना होगा। सभी स्कूल बोर्डों को पारदर्शी नियमों और स्कूल गुणवत्ता मूल्यांकन संबंधी न्यूनतम गुणवत्ता मानदंडों को पूरा करना चाहिए। हर बोर्ड के छात्रों को एक मंच पर लाने के लिए मूल्यांकन विधियों में एकरूपता भी आवश्यक है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लागू होने के बाद न केवल बोर्ड परीक्षाओं के पैटर्न में बदलाव होंगे, बल्कि हर कक्षा में मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा करनी होगी। गुणवत्तापूर्ण प्रश्नपत्र तैयार किए जाने चाहिए। संस्थागत स्व-मूल्यांकन, शिक्षक क्षमता विकास और डेटा पारदर्शिता पर ज़ोर दिया गया।
बोर्ड सामान्य और व्यावसायिक शिक्षा को एकीकृत करने के लिए खुद को तैयार करेंगे। व्यावसायिक प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए स्कूल बोर्डों को सशक्त बनाने से कौशल-आधारित शिक्षा तक पहुँच में सुधार होगा, जो रोज़गारपरकता और आजीवन शिक्षा के राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप होगा।
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