CUET UG परीक्षा का प्रश्नपत्र कठिन होता जा रहा है। मानक पेपर न होने के आरोप लग रहे हैं। CUET परीक्षा में 3 बड़ी गड़बड़ियाँ बताई जा रही हैं। एक्सपर्ट ओपिनियन।
इन दिनों कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET UG 2025) चल रहा है। छात्रों के साथ-साथ एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने CUET परीक्षा के लिए जो सिलेबस, गाइडलाइन जारी की थी, उसमें कई बदलाव किए गए हैं, ऐसे में पेपर उनके अकाउंट से नहीं आ रहे हैं। CUET में छात्रों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सेंटर बहुत दूर है, कई सेंटर पर बिजली कटौती की समस्या और हाल ही में अकाउंट्स के पेपर में सिलेबस से बाहर के सवालों पर दोबारा टेस्ट का विचार सामने आ रहा है।
दरअसल, 2025 में होने वाली CUET की समस्या शुरू से ही देखने को मिल रही है। पहले परीक्षाएं 8 मई से शुरू होनी थीं। लेकिन इसे 13 मई तक टाल दिया गया था। इसके बाद 13-16 मई के बीच अकाउंट्स का पेपर देने वाले छात्रों को दोबारा परीक्षा देने का विकल्प दिया गया है।
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CUET यूजी की समस्या |
विस्तार |
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CUET सेंटर दूर होने से समस्या |
सूत्रों का कहना है कि 13-16 के बीच हुई CUET की परीक्षा में अकाउंट्स के पेपर में करीब 65 से 70 हजार छात्रों को एग्जाम देना था। सात शिफ्ट में पेपर हुआ। अब रीटेस्ट के लिए करीब आठ हजार छात्रों ने अप्लाई किया है। वहीं बहुत से छात्र ऐसे भी हैं, जो सेंटर दूर होने के कारण एग्जाम नहीं दे पाए हैं। मेघालय, जम्मू के कई छात्रों का सेंटर दूसरे राज्य में दिया गया, जिसके बाद सेंटर बदलने के लिए आवेदन किया गया। |
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CUET क्वेश्चन पेपर में अंतर |
छात्रों का कहना है कि जनरल टेस्ट के पेपर में किसी शिफ्ट में तो बहुत ज्यादा न्यूमैरिकल्स एबिलिटी के सवाल आ जाते हैं, तो किसी शिफ्ट में जनरल नॉलेज के ज्यादा सवाल होते हैं। छात्रों का कहना है कि अलग-अलग शिफ्ट में आए क्वेश्चन पेपर में ज्यादा अंतर दिखाई देता है। |
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नॉर्मलाइजेशन की चुनौती |
विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर अलग-अलग शिफ्टों में क्वेश्चन पेपर में ज्यादा अंतर होगा तो फिर एनटीए के लिए नॉर्मलाइजेशन करना भी बड़ी चुनौती होगा। यह तय करना होगा कि कौन सी शिफ्ट का पेपर आसान था, कौन सी शिफ्ट में मुश्किल था, कौन सी शिफ्ट में बहुत मुश्किल था। नॉर्मलाइजेशन को लेकर वैसे भी सवाल उठते रहते हैं। |
वैज्ञानिक परामर्शदाता आलोक बैसाख कहते हैं कि CUET के क्वेश्चन पेपर NTA की वेबसाइट के अनुसार नहीं आ रहे हैं। प्रश्नपत्र के मानक पर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्र काफी भ्रमित हो रहे हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) का उदाहरण देते हुए कहा कि 'कुछ समय पहले डीयू में बैचलर ऑफ स्ट्रोमर स्टडीज समेत कई कोर्स के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा हुई थी। परीक्षा के समय ऐसा हुआ और जो सिलेबस तैयार था, उसी से प्रश्न पूछे गए। परिणाम भी समय पर आता है।'
उनका कहना है कि 'अब CUET 2025 में पहले चरण से ही छात्रों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर उनकी मेड पर भी पड़ रहा है। CUET के पहले चार दिनों में जो अकाउंट्स का पेपर हुआ, उसमें कई सवाल शामिल थे। उसके बाद NTA को प्रश्न सूची को लोकतांत्रिक बनाने और छात्रों को फिल्म निरीक्षण का मौका दिया गया है। इन सभी मुद्दों पर विचार करने की जरूरत है।'
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