CUET UG Exam Pattern 2026: शिक्षा मंत्रालय CUET UG परीक्षा पैटर्न की समीक्षा करने जा रहा है। 2022 से 2025 तक की परीक्षाओं में प्राप्त शिकायतों और उनके परिणाम पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा का एक निश्चित पैटर्न होना चाहिए। बार-बार बदलाव से छात्रों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
साल 2022 से शुरू हुए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET- UG) का पैटर्न एक बार फिर बदल सकता है। हर साल इस परीक्षा की प्रक्रिया में कुछ न कुछ बदलाव देखने को मिलता है। यह परीक्षा चार बार आयोजित हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई कॉमन पैटर्न तय नहीं हो पाया है। इस साल की परीक्षा में भी छात्रों ने फिजिकल एजुकेशन समेत कई विषयों की परीक्षा में सिलेबस से बाहर के सवालों की शिकायत की, वहीं जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट में एक शिफ्ट में जनरल मेंटल एबिलिटी और दूसरी शिफ्ट की परीक्षा में न्यूमेरिकल एबिलिटी के सवाल ज्यादा थे।
सूत्रों का कहना है कि शिक्षा मंत्रालय ने 2022 से 2025 तक आयोजित होने वाली CUET UG परीक्षा की प्रक्रिया की समीक्षा करने का फैसला किया है। हर साल किस तरह की शिकायतें आईं, उसका रिजल्ट पर कितना असर पड़ा, यह सब देखा जाएगा। प्रवेश परीक्षा में प्रश्नों को लेकर आई शिकायतों की भी समीक्षा की जाएगी। ऐसे में उम्मीद है कि 2026 में एक बार फिर पैटर्न में कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे।
करियर काउंसलर आलोक बंसल कहते हैं कि किसी भी परीक्षा का एक निर्धारित पैटर्न होना चाहिए और छात्रों को पता होना चाहिए कि प्रतियोगी परीक्षा का पैटर्न और सिलेबस क्या होगा। उनका कहना है कि 12वीं कक्षा का छात्र इंजीनियरिंग, मेडिकल और CUET समेत कई तरह की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करता है। CUET 2025 में छात्रों को परीक्षा से कुछ समय पहले पता चल जाता है कि नया पैटर्न क्या होगा?
उनका कहना है कि 2026 में होने वाली विश्वविद्यालय परीक्षाओं के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी को उद्योग, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करनी चाहिए और अगले एक महीने के भीतर छात्रों को यह बताना चाहिए कि अगले साल की परीक्षा कैसे आयोजित की जाएगी। आलोक बंसल का कहना है कि 2025 में कई प्रवेश परीक्षाओं में छात्रों की संख्या कम हो गई है क्योंकि छात्र निजी विश्वविद्यालयों की ओर भी रुख कर रहे हैं।
उनका कहना है कि CUET की अंतिम उत्तर कुंजी के आधार पर कई छात्रों का कहना है कि उनके अंक पहले ज़्यादा आते थे, लेकिन नॉर्मलाइज़ेशन प्रक्रिया के कारण उनके अंक कम हो गए। ऐसे में पारदर्शी व्यवस्था का होना बेहद ज़रूरी है।
2022 में जब CUET UG शुरू हुआ, तो यह कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT मोड में था और छात्रों को 9 विषयों में परीक्षा देने का विकल्प दिया गया था। 2023 में, 10 विषयों में परीक्षा देने का नियम बनाया गया। 2024 में, परीक्षा को हाइब्रिड मोड में लाया गया और छात्रों को 6 विषय चुनने का विकल्प मिला। 2025 में, पूरी परीक्षा फिर से CBT मोड में लाई गई और विषयों की संख्या घटाकर 5 कर दी गई।
सूत्रों का कहना है कि 2026 की परीक्षा के लिए ऐसे पैटर्न पर फैसला लिया जाएगा, जिसे हर बार बदलना न पड़े। हाइब्रिड परीक्षा का प्रयोग 2024 में सफल रहा था, जब प्रमुख विषयों की परीक्षा एक ही दिन आयोजित की गई थी। पिछले साल रसायन विज्ञान, भौतिकी, अंग्रेजी, सामान्य परीक्षण, जीव विज्ञान समेत कई प्रमुख विषयों की परीक्षा एक ही पाली में आयोजित की गई थी।
इसके चलते सभी छात्रों को एक जैसा प्रश्नपत्र मिला। शिक्षा मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय समिति की इस सप्ताह एक महत्वपूर्ण बैठक होनी है, जिसमें प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं की प्रभावशीलता, निष्पक्षता और कोचिंग उद्योग के विकास पर उनके प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा।
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