डॉ. राम मनोहर मूर्ति लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए राहत की खबर है। अब दो-तीन अंकों से फेल होने वाले छात्रों को ग्रेस मार्क्स मिलेंगे। यूनिवर्सिटी ने इस प्रावधान को मंजूरी दे दी है। ग्रेस मार्क्स देने का अधिकार कुलपति को होगा। छात्र को आवेदन देकर कारण बताना होगा। अंधविश्वास के बारे में जानने के लिए वीडियो देखें।
डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में दो या तीन अंकों से फेल होने वालों के लिए अब राहत की खबर है। विश्वविद्यालय अभ्यर्थियों के लिए ग्रेस मार्क्स का प्रस्ताव दे रहा है। इस प्रस्ताव पर विश्वविद्यालय ने विचार कर लिया है। इसके तहत अब कोई भी छात्र तीन अंकों तक के ग्रेस डिग्री से पास हो सकता है। अभी तक इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, जिसके तहत अगर वास्तविक समय में छात्र न्यूनतम उत्तीर्ण अंकों से एक अंक भी कम रह जाता है तो उसे फेल कर दिया जाता।
विश्वविद्यालय में परीक्षा के नए सत्र में बदलाव किया गया है। इसके तहत ग्रेस मार्क्स का प्रस्ताव शामिल है। खास बात यह है कि इस मार्क्स प्रस्ताव के लिए सिर्फ वीजा दिया गया है। मूल्यांकन के दौरान पूछे गए सवालों के जवाब के आधार पर भी अंक दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि रिटेल का रिजल्ट भी जारी किया जाएगा।
अगर वह फेल हो जाता है और ग्रेस मार्क्स से पास होने की स्थिति में है तो उसे अपने विवेक से फैसला लेना चाहिए। नए नियम में यह भी साफ कर दिया गया है कि कोई भी अपने अधिकार में ग्रेस मार्क्स की मांग नहीं कर सकता। अगर वीसी की नियुक्ति नहीं हुई है तो वह भी ग्रेस मार्क्स देने से मना कर देगा।
यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता शशांक शेखर ने बताया कि इसके लिए रिजल्ट के बाद स्टोर से आवेदन करना होगा। ग्रेस मार्क्स के लिए भी आवेदन प्राप्त करें, इसे सभी वीसी को भेजा जाएगा। आवेदन में छात्रों को यह भी लिखना होगा कि उन्हें परीक्षा में इतने कम अंक क्यों मिले। अगर किसी मेडिकल कंडीशन या मानसिक स्थिति के कारण परीक्षा पर ध्यान नहीं दे पाए तो उसे याद दिलाना होगा।
नियमों के अनुसार, एक से ज़्यादा पेपर में तीन अंक दिए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई छात्र तीन पेपर में एक-एक अंक से फेल हो जाता है, तो तीनों में एक-एक अंक दिया जा सकता है। ज़्यादातर मामलों में, कुल परिणाम में ग्रेस के तौर पर सिर्फ़ तीन अंक ही दिए जाते हैं।
विश्वविद्यालय की स्थापना के समय शुरू में ग्रेस मार्क्स का प्रोजेक्ट कैथोलिक में था, लेकिन बाद में मिथक का प्रक्षेपण समाप्त कर दिया गया। अब उत्सुक छात्रों को ध्यान में रखते हुए ईमेल में बदलाव किया गया है। नए प्रावधान में छात्रों द्वारा सबमिट किए गए असेसमेंट को देखा जाएगा और उसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि अंक हैं या नहीं। इससे ग्रेस मार्क्स का मिथक पैदा नहीं हो सकेगा।
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