सुप्रीम कोर्ट ने NEET PG में सीट ब्लॉकिंग पर नाराजगी जताई है। साथ ही मेडिकल कॉलेजों को NEET PG काउंसलिंग से पहले मेडिकल PG फीस का खुलासा करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने NEET PG में बड़े पैमाने पर हो रही सीट ब्लॉकिंग (सीट प्रतिबंध की प्रक्रिया) पर चिंता जताई है। साथ ही निजी और डीएमडी विश्वविद्यालयों को नीट पीडियाट्रिक से पहले सुझाव देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पोस्ट कॉमर्स मेडिकल कोर्स में शिक्षकों के लिए सीट ब्लॉकिंग की घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया है। कोर्ट ने सीट ब्लॉकिंग के लिए सजा की भी बात कही है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सीट ब्लॉकिंग की कुप्रथा को असली क्रीम ऑफ क्रीम बना दिया गया है। इससे बीच में ही पदोन्नति को बढ़ावा मिल रहा है। अक्सर यह प्रक्रिया योग्यता के बजाय भाग्य पर आधारित होती है। कोर्ट ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि 'NEET PG 2025 भर्ती कैलेंडर को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाना चाहिए।' ताकि ऑल इंडिया कोटा और स्टेट के अंक एक साथ हों। साथ ही नीट में सीट ब्लॉकिंग को रोका जा सके।
सीट ब्लॉकिंग भर्ती प्रक्रिया का एक चरण है जिसमें किसी कॉलेज में सीट ब्लॉक करने के लिए उम्मीदवार का चयन किया जाता है। हालांकि, उसे उस सीट पर कोई खरीदारी नहीं करनी होती है। ताकि वह किसी और के पास न चली जाए। बाद में वे सीट पर चर्चा होने का इंतजार करते हैं। या फिर कहीं और बेहतर सीट दी जाती है तो उसे छोड़ दिया जाता है। ऐसी स्थिति में उम्मीदवार और इच्छुक उम्मीदवार भी उस सीट को हासिल नहीं कर पाते हैं और अंत में वह खाली रह जाती है।
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