सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को NEET PG को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए एक शिफ्ट में वोटिंग कराने का आदेश दिया। आइए जानते हैं पूरी टाइमलाइन और अब तक का अपडेट.
NEET PG 2025 को लेकर छात्रों में लंबे समय से चल रहे असमंजस और प्राचार्यों की मांग पर आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अब यह परीक्षा दो नहीं बल्कि एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी, जिससे छात्रों को नामांकन की संख्या से राहत मिलेगी।
NEET PG 2025 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 17 अप्रैल 2025 को शुरू हुई थी और 7 मई 2025 को समाप्त हुई थी। इस दौरान छात्रों और डॉक्टर संगठनों की ओर से परीक्षा को लेकर कई मांगें उठाई गईं। 21 अप्रैल को फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने मांग की थी कि NEET PG परीक्षा एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाए ताकि सभी उम्मीदवारों के लिए समानता हो। इसके बाद 5 मई को यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
22 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल शिक्षा के छात्रों को फीस मुक्त पढ़ाई कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद 30 मई को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए निर्देश दिया कि 2025 की परीक्षा एक ही शिफ्ट में कराई जाएगी, ताकि सभी प्रतिभागियों को सुविधा का मौका मिल सके। अब परीक्षा मूल रूप से तय समय 15 जून 2025 को होगी और परिणाम 15 जुलाई 2025 को घोषित होने की संभावना है।
आइए डालते हैं नजर इस परीक्षा से जुड़े अब तक के सभी प्रमुख घटनाक्रमों पर:
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तारीख |
घटनाक्रम |
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17 अप्रैल, 2025 |
NEET PG 2025 के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हुई |
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21 अप्रैल, 2025 |
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने परीक्षा एक शिफ्ट में कराने की मांग की |
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5 मई, 2025 |
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की |
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7 मई, 2025 |
NEET PG पंजीकरण प्रक्रिया समाप्त |
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22 मई, 2025 |
सुप्रीम कोर्ट ने फीस स्ट्रक्चर पारदर्शी करने के निर्देश दिए |
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30 मई, 2025 |
सुप्रीम कोर्ट का फैसला - परीक्षा एक ही शिफ्ट में कराई जाएगी |
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15 जून, 2025 |
NEET PG परीक्षा की संभावित तिथि |
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15 जुलाई, 2025 |
NEET PG परिणाम की संभावित तिथि |
विक्रम नाथ, संजय कुमार और एनवी अंजारिया की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दो शिफ्ट में परीक्षा आयोजित करना छात्रों के लिए नुकसानदेह है। प्रश्नपत्र कभी एक जैसे नहीं हो सकते। इसलिए परीक्षा एक ही शिफ्ट में आयोजित की जानी चाहिए। कोर्ट ने एनबीई (NBE) के इस तर्क की गंभीरता से समीक्षा की कि विश्वविद्यालय परीक्षा केंद्र नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि आज के तकनीकी युग में यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पिछले साल की तरह इस साल भी परीक्षा दो शिफ्ट में कराने की घोषणा की गई थी, लेकिन छात्र-सहायक मित्रता और समानता की मांग को लेकर कोर्ट चले गए। उनका कहना था कि नाममात्र की व्यवस्था शाब्दिक नहीं है और इससे संबंधित संबद्धता को नुकसान पहुंचता है।
अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने एक शिफ्ट में परीक्षा कराने का आदेश दिया है, तो उम्मीद है कि परीक्षा में शामिल होने वाले लोग और छात्र अपने कौशल का इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही NBAEMS की मांग है कि प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी को सार्वजनिक किया जाए ताकि सहयोग जारी रहे।
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