JEE Advanced 2025 का रिजल्ट जारी हो चुका है और एडमिशन के लिए काउंसिलिंग प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इस बार रैंक का निर्धारण टाई ब्रेकर के नए नियमों के तहत किया गया है। JEE Advanced ने रैंक निर्धारण को लेकर किसी तरह का विवाद न खड़ा हो इससे निपटने के लिए परीक्षा से पहले ही एक टाई ब्रेकर नियम तैयार किया गया था।
JEE Advanced 2025 के नतीजे घोषित होने के साथ ही मंगलवार से काउंसिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसका अनुवाद कीवर्ड खोला गया है। यह बात अलग है कि इसके प्रवेश में संख्याओं से लेकर रैंक की विशेषताएँ हैं, क्योंकि इसके आधार पर प्रवेश में विशिष्टताएँ दी गई हैं। संस्था में इस बार टाइम ब्रेकर के नए सिस्टम से जुड़ने का दावा किया गया है। इसके आधार पर टॉपर सहित पूरी रैंक की तैयारी दी गई है।
टाई-ब्रेकर नियम का इस्तेमाल तब किया जाता है जब दो या उससे ज़्यादा छात्र समान अंक प्राप्त करते हैं। JEE Advanced 2025 के टॉपर रजित गुप्ता भी टाई-ब्रेकर नियम के कारण ही टॉपर बने, क्योंकि इस परीक्षा में दूसरे स्थान पर रहने वाले छात्र सक्षम जिंदल ने भी उनके बराबर 332 अंक प्राप्त किए थे। JEE Advanced की रैंकिंग को लेकर किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए परीक्षा से पहले टाई-ब्रेकर नियम बनाया गया था, जो दो चरणों में होता है।
पहले चरण में अगर दो या उससे अधिक छात्रों के कुल अंक समान हैं तो उन्हें उच्च रैंक दी जाती है, जिसमें उच्च सकारात्मक अंक सबसे अधिक होता है। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि जिसके अंक सबसे कम होते हैं उसे उच्च रैंक दी जाती है। अगर इसके बाद भी दोनों के बीच अंकों का अंतर खत्म नहीं होता है तो दूसरा चरण इस्तेमाल किया जाता है। दूसरे चरण में जिसके गणित में अधिक अंक होते हैं उसे उच्च रैंक दी जाती है अगर इसके बाद भी अंतर खत्म नहीं होता है।
इसलिए जिन छात्रों के भौतिकी में सबसे ज़्यादा अंक होते हैं, उन्हें उच्च रैंक दी जाती है। अगर फिर भी यही स्थिति बनी रहती है, तो दोनों छात्रों को बराबर रैंक दी जाती है। क्लासिक यह है कि पहले टाई ब्रेकर में उम्र और काम करने वालों की संख्या भी शामिल होती थी। यानी अगर कोई बूढ़ा है या उसमें ज़्यादा टैलेंट है, तो उसे उच्च रैंक दी जाती थी।
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